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    12 लाख रुपए तक की आय को टैक्स फ्री करने से बढ़ी चुनावी लाभ की संभावना

    News DeskBy News DeskFebruary 3, 2025No Comments5 Mins Read
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    12 लाख रुपए तक की आय को टैक्स फ्री करने से बढ़ी चुनावी लाभ की संभावना

    देवानंद सिंह
    वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए बजट ने वैसे तो कई पहलुओं को छुआ है, लेकिन इस बार सबसे अधिक चर्चा मध्यम वर्ग की लेकर हो रही है, क्योंकि इस बार टैक्स में 12 लाख रुपए तक की आय को टैक्स फ्री कर दिया गया है। दिल्ली में चुनाव के मद्देनजर यह बीजेपी का एक मास्टर स्ट्रोक भी है, क्योंकि इसका सीधा असर भारतीय नागरिकों, खासकर मध्यम वर्ग और युवाओं पर पड़ने की संभावना पड़ना है, इसे सरकार ने “आम आदमी के सपनों को पूरा करने वाला” कदम बताया।

     

    प्रधानमंत्री मोदी ने बजट को “विकसित भारत के मिशन” के रूप में पेश किया है, जो देश के 140 करोड़ नागरिकों की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। टैक्स फ्री आय की सीमा को 12 लाख रुपए तक बढ़ाना, खासकर सैलरीड क्लास के लिए 12 लाख 75 हजार रुपए तक बढ़ाई गई सीमा, इसे एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। सरकार का यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए है कि आम नागरिक अपने खर्चों को बढ़ा सकें, जिससे घरेलू मांग और खपत में वृद्धि हो सके, जो आर्थिक विकास के लिए जरूरी है।

     

     

    हालांकि, यह निर्णय अर्थव्यवस्था को जल्द ही बड़ी गति नहीं दे सकता, लेकिन यह सियासी लाभ जरूर दे सकता है। दिल्ली विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र, जहां बड़े संख्या में वेतनभोगी वर्ग के लोग हैं, इस कदम से भाजपा को फायदा हो सकता है। प्रधानमंत्री मोदी ने खुद इस बात को स्वीकार किया है कि आगामी चुनावों के संदर्भ में यह एक अहम कदम हो सकता है। नई टैक्स नीति में बदलाव का सबसे बड़ा पहलू यह है कि 12 लाख रुपए तक की सालाना आय को टैक्स फ्री कर दिया गया है। इसके परिणामस्वरूप, करीब 2.5 करोड़ लोग, जो मुख्य रूप से सरकारी क्षेत्र, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुद्धिजीवी वर्ग से जुड़े हैं, सीधे तौर पर इससे लाभान्वित होंगे। यह कदम उन लोगों के लिए राहत का कारण बनेगा, जिन्हें बढ़ती महंगाई और खर्चों के बीच वित्तीय दबाव का सामना करना पड़ता है। हालांकि, विशेषज्ञ इस फैसले से आम आर्थिक गतिविधियों में कोई बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिलेगा, क्योंकि यह केवल एक छोटे वर्ग को राहत देगा।

     

     

    यह टैक्स कटौती उपभोक्ताओं की मांग को बढ़ावा दे सकती है, खासकर उन वर्गों में जो खाद्य महंगाई से जूझ रहे हैं। जब उपभोक्ताओं के पास अधिक पैसा होगा, तो वे अधिक खर्च करेंगे, जिससे कंज्यूमर कंपनियों को फायदा हो सकता है, हालांकि, मूडीज़ रेटिंग्स जैसे संस्थान इसके असर को लेकर अधिक आश्वस्त नहीं हैं और मानते हैं कि यह कदम सिर्फ थोड़े समय के लिए प्रभावी हो सकता है, जबकि दीर्घकालिक परिणाम अनिश्चित हो सकते हैं। भारत की आर्थिक स्थिति में इस समय सुस्ती देखने को मिल रही है और जीडीपी वृद्धि दर में गिरावट का अनुमान है। सरकार का कहना है कि अगर, भारत को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाना है, तो इसके लिए जीडीपी वृद्धि की दर 8% से कम नहीं होनी चाहिए। ऐसे में, सरकार का यह कदम, विशेष रूप से मध्यम वर्ग को अधिक खर्च करने के लिए प्रेरित करना, भारत की आर्थिक वृद्धि को गति देने के लिए एक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।

    नई टैक्स नीति में पुराने टैक्स रिजीम का जिक्र तक नहीं किया गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि सरकार का उद्देश्य अब बचत को बढ़ावा देने की बजाय उपभोक्ता खर्च को प्रोत्साहित करना है। यह निर्णय आर्थिक विकास को बढ़ावा देने के लिए जरूरी माना जा रहा है, क्योंकि जब लोग अधिक खर्च करेंगे, तो इससे उत्पादन और रोजगार में भी वृद्धि होगी। बजट भाषण के दौरान निर्मला सीतारमण ने कुछ राज्यों का उल्लेख किया, जिनमें सबसे अधिक बिहार का नाम लिया गया। बिहार में मखाना बोर्ड का गठन करने और नए एयरपोर्ट बनाने की घोषणा की गई। बिहार में बीजेपी की गठबंधन सरकार के साथ चुनाव नजदीक होने के कारण, यह कदम भी सियासी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हो सकता है। इस प्रकार, सरकार ने बजट में राज्यवार घोषणाओं के माध्यम से भी चुनावी लाभ की संभावना को बढ़ाया है।

    वर्तमान बजट में सरकार ने कई महत्वपूर्ण फैसले किए हैं, जिनका उद्देश्य आर्थिक विकास को गति देना, मध्यम वर्ग को राहत देना और शहरी खपत को बढ़ावा देना है। हालांकि, यह कदम चुनावी लाभ की रणनीति भी प्रतीत होती है, विशेषकर दिल्ली विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए। इसके अलावा, बजट में किए गए बदलावों के प्रभाव पर विशेषज्ञों की राय मिश्रित है, कुछ इसे अर्थव्यवस्था के लिए फायदेमंद मानते हैं, जबकि कुछ इसे सिर्फ एक छोटे वर्ग को फायदा पहुंचाने वाला कदम मानते हैं। अंततः, यह बजट आर्थिक दृष्टिकोण से एक सावधानीपूर्वक कदम है, जो मध्यम वर्ग के खर्च करने की क्षमता को बढ़ाने के उद्देश्य से उठाया गया है, ताकि घरेलू मांग में वृद्धि हो सके। हालांकि, इसका दीर्घकालिक प्रभाव क्या होगा, यह देखना होगा, और क्या यह भारत की आर्थिक सुस्ती को दूर कर पाएगा, इस पर समय ही बताएगा।

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