एक दशक से बिरसानगर थाना पर निलंबन की तलवार क्यों?
बार-बार कार्रवाई के बावजूद व्यवस्था में सुधार क्यों नहीं, पुलिस प्रशासन करे आत्ममंथन
देवानंद सिंह
जमशेदपुर के बिरसानगर थाना में पदस्थापित थाना प्रभारियों पर बार-बार निलंबन की कार्रवाई होना महज संयोग है या व्यवस्था की कोई गहरी खामी? यह सवाल अब गंभीर समीक्षा की मांग करता है। एक अक्टूबर 2026 को थाना प्रभारी संतोष कुमार पांडेय के निलंबन के बाद एक बार फिर पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली चर्चा के केंद्र में है। भाजपा के पूर्व जिला अध्यक्ष दिनेश कुमार द्वारा उठाए गए सवाल इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण हैं।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आखिर एक दशक के दौरान बिरसानगर थाना में ऐसी परिस्थितियां बार-बार क्यों बनती रही हैं, जिनके कारण थाना प्रभारियों को निलंबन का सामना करना पड़ा? क्या पुलिस प्रशासन ने कभी बैठकर इसकी विस्तृत समीक्षा की है? क्या पिछली घटनाओं से सबक लेकर जवाबदेही तय की गई, अथवा हर बार कार्रवाई के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया?
किसी अधिकारी का निलंबन तत्काल कार्रवाई का संकेत हो सकता है, लेकिन इससे व्यवस्था की बुनियादी समस्याओं का समाधान अपने आप नहीं हो जाता। यदि एक ही थाना लगातार विवादों और विभागीय कार्रवाई के कारण चर्चा में आता है, तो केवल व्यक्तियों को बदलना पर्याप्त नहीं है। यह भी देखना होगा कि कहीं कार्यप्रणाली, निगरानी, जवाबदेही अथवा शिकायतों के निस्तारण में कोई स्थायी कमी तो नहीं है।
बिरसानगर क्षेत्र में जमीन संबंधी विवादों, कथित बिचौलियों की सक्रियता और पुलिस-जनता के संबंधों को लेकर उठने वाले सवालों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
आरोपों की पुष्टि जांच से होनी चाहिए, लेकिन शिकायतों की अनदेखी भी नहीं होनी चाहिए।
पूर्वी सिंहभूम पुलिस प्रशासन को पिछले दस वर्षों की घटनाओं, निलंबन और विभागीय कार्रवाइयों की समीक्षा कर वास्तविक स्थिति सामने रखनी चाहिए।
सवाल किसी एक थाना प्रभारी का नहीं, पूरी व्यवस्था की जवाबदेही का है। आखिर बिरसानगर थाना में बार-बार वही स्थिति क्यों पैदा होती है? जनता को इसका जवाब मिलना चाहिए।

