वर्ल्ड इनकॉन्टिनेंस वीक: मूत्र रिसाव को नजरअंदाज न करें, उपचार संभव — डॉ. अंशु कुमार
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर: वर्ल्ड इनकॉन्टिनेंस वीक के अवसर पर टाटा मेन हॉस्पिटल के यूरोलॉजिस्ट डॉ. अंशु कुमार ने कहा कि मूत्र रिसाव (यूरिनरी इन्कॉन्टिनेंस) एक सामान्य लेकिन उपचार योग्य चिकित्सीय समस्या है। इसे बढ़ती उम्र का सामान्य हिस्सा या शर्म की बात मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
उन्होंने बताया कि महिलाओं में स्ट्रेस यूरिनरी इन्कॉन्टिनेंस सबसे अधिक देखा जाता है, जिसमें खांसी, छींक, हंसने, दौड़ने या वजन उठाने के दौरान मूत्र का रिसाव हो सकता है। वहीं अर्ज इन्कॉन्टिनेंस में अचानक तेज पेशाब लगने पर समय पर शौचालय नहीं पहुंच पाने से रिसाव होता है। कुछ मरीजों में दोनों प्रकार के लक्षण एक साथ भी पाए जाते हैं।
डॉ. कुमार ने कहा कि यह समस्या केवल महिलाओं तक सीमित नहीं है। पुरुषों में प्रोस्टेट ग्रंथि के बढ़ने (बीपीएच) के कारण भी बार-बार पेशाब लगना, मूत्र रिसाव और मूत्राशय संबंधी अन्य समस्याएं हो सकती हैं।
उन्होंने बताया कि जीवनशैली में बदलाव, वजन नियंत्रण, चाय-कॉफी का सीमित सेवन, कब्ज से बचाव और नियमित पेशाब की आदत अपनाने से लाभ मिलता है। केगल एक्सरसाइज स्ट्रेस इन्कॉन्टिनेंस में प्रभावी है, जबकि अर्ज इन्कॉन्टिनेंस के लिए दवाएं और जरूरत पड़ने पर आधुनिक उपचार विकल्प उपलब्ध हैं।
डॉ. अंशु कुमार ने लोगों से अपील की कि मूत्र रिसाव की समस्या को छिपाने के बजाय समय पर यूरोलॉजिस्ट से परामर्श लें, क्योंकि सही उपचार से जीवन की गुणवत्ता और आत्मविश्वास में उल्लेखनीय सुधार संभव है।

