मंदिरों के फूलों से बदली महिलाओं की तकदीर, आत्मनिर्भरता की नई मिसाल बना पूर्वी सिंहभूम
राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर: मंदिरों में चढ़ाए जाने वाले फूल, जिन्हें कभी कचरा समझकर फेंक दिया जाता था, आज पूर्वी सिंहभूम की महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का माध्यम बन गए हैं। टाटा स्टील फाउंडेशन के सहयोग से स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं मंदिरों से एकत्रित फूलों को सजावटी धूप कोन में बदल रही हैं।
इस पहल से 30 महिलाएं जुड़ी हुई हैं, जो फूलों के संग्रहण से लेकर प्रसंस्करण, उत्पादन और विपणन तक की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। अब तक 5.5 टन से अधिक फूलों के कचरे का पुनर्चक्रण किया जा चुका है और 61 हजार रुपये से अधिक के उत्पादों की बिक्री हुई है।
महिलाओं का कहना है कि इस पहल ने उन्हें न सिर्फ आय का स्रोत दिया है, बल्कि आत्मविश्वास और नई पहचान भी दिलाई है। वहीं, यह अभियान पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी एक मिसाल बन रहा है।

