लेखक: राष्ट्र संवाद संवाददाता
जमशेदपुर के बिष्टुपुर थाना क्षेत्र में अवैध वसूली का सनसनीखेज मामला सामने आने के बाद पुलिस प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने ट्रैफिक पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए, जिसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने तत्काल संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए। इस घटना ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा अभियान की आड़ में चल रहे भ्रष्टाचार के खेल को उजागर कर दिया है।
अवैध वसूली के आरोप में तीन पुलिसकर्मी निलंबित
जमशेदपुर। बिष्टुपुर ट्रैफिक थाना क्षेत्र में वाहन जांच के दौरान कथित अवैध वसूली का मामला सामने आने के बाद पुलिस विभाग ने बड़ी कार्रवाई की है। सोशल मीडिया पर वायरल हुए एक वीडियो में ट्रैफिक पुलिस द्वारा एक बाइक चालक से रुपये लेते हुए दिखाई देने के बाद मामले की जांच कराई गई। जांच में आरोप सही पाए जाने पर एसएसपी डॉ. एहतेशाम वकारिब ने एएसआई ललन सिंह तथा आरक्षी प्रकाश कुमार साव और पंकज कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया।
वायरल वीडियो बना कार्रवाई का आधार
वायरल वीडियो में ट्रैफिक पुलिस रीगल गोलचक्कर के पास वाहन जांच करती दिखाई दे रही है। वीडियो के अनुसार एक बाइक चालक को रोककर पहले पूछताछ की जाती है, फिर उसे एएसआई के पास भेजा जाता है। आरोप है कि चालान से बचाने के नाम पर उससे नकदी ली गई, जिसकी पूरी घटना मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया।
डीएसपी ट्रैफिक की जांच में आरोप सही
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी ने ट्रैफिक डीएसपी को जांच का निर्देश दिया। जांच के दौरान वायरल वीडियो की सत्यता की पुष्टि हुई और रुपये लेने की बात सही पाई गई। जांच रिपोर्ट मिलते ही एसएसपी ने संबंधित तीनों पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का आदेश जारी कर दिया।
सड़क सुरक्षा अभियान पर उठे सवाल
इस घटना के बाद सड़क सुरक्षा और वाहन जांच अभियान की पारदर्शिता पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का कहना है कि यदि सड़क सुरक्षा के नाम पर अवैध वसूली की घटनाएं सामने आती हैं तो इससे पुलिस की साख प्रभावित होती है और आम जनता का भरोसा कमजोर पड़ता है।
रीगल गोलचक्कर पर हुई थी घटना
जानकारी के अनुसार बिष्टुपुर ट्रैफिक पुलिस रीगल गोलचक्कर के पास नियमित वाहन जांच अभियान चला रही थी। इसी दौरान एक बाइक चालक को रोककर कथित रूप से चालान से बचाने के बदले नकदी लेने का आरोप लगा। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद विभागीय जांच शुरू हुई, जिसमें आरोप सही पाए जाने पर तीनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की गई।
पुलिस प्रशासन की साख पर लगा दाग
इस पूरी घटना ने जमशेदपुर पुलिस की छवि को गहरा धक्का पहुंचाया है। रीगल गोलचक्कर शहर का व्यस्ततम चौराहा है, जहां दिनभर हजारों वाहनों का आवागमन होता है। ऐसे संवेदनशील स्थान पर ट्रैफिक पुलिसकर्मियों द्वारा खुलेआम रिश्वत लेने का वीडियो सामने आना चिंताजनक है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि वाहन जांच के नाम पर अक्सर आम लोगों को परेशान किया जाता है और चालान का भय दिखाकर अवैध वसूली की जाती है। इस घटना ने उन शिकायतों की पुष्टि कर दी है जो लंबे समय से आम जनता द्वारा दर्ज कराई जा रही थीं।
भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की दिशा में कदम
एसएसपी डॉ. एहतेशाम वकारिब द्वारा त्वरित कार्रवाई करना सराहनीय कदम है। इससे यह संदेश जाता है कि भ्रष्टाचार के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई जा रही है। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि केवल निलंबन पर्याप्त नहीं है; ऐसे मामलों में विभागीय जांच के साथ-साथ कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित होनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई भी पुलिसकर्मी ऐसा दुस्साहस न कर सके। भारत में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं और इसे जड़ से उखाड़ने के लिए प्रणालीगत सुधारों की आवश्यकता है।
पुलिस विभाग को चाहिए कि वह वाहन जांच की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाए। बॉडी कैमरा, सीसीटीवी निगरानी और डिजिटल चालान प्रणाली को अनिवार्य किया जाए ताकि किसी भी प्रकार की अवैध वसूली की गुंजाइश न रहे। साथ ही, आम नागरिकों को भी अपने अधिकारों के प्रति जागरूक होने की जरूरत है। यदि कोई पुलिसकर्मी अनुचित मांग करता है तो उसकी शिकायत उच्च अधिकारियों या भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से करनी चाहिए।
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