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    आईसीयू (ICU) वार्ड में अचानक आग लग गई, मरीज सुरक्षित

    Sumi BangabashBy Sumi BangabashJuly 24, 2026Updated:July 24, 2026No Comments4 Mins Read
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    लेखक: राष्ट्र संवाद संवादाता

    आदित्यपुर: औद्योगिक क्षेत्र आदित्यपुर स्थित मेडिट्रीना अस्पताल में शुक्रवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब अस्पताल के आईसीयू (ICU) वार्ड में अचानक आग लग गई। आग की सूचना मिलते ही अस्पताल प्रशासन हरकत में आया और तत्काल राहत एवं बचाव कार्य शुरू कर दिया गया। समय रहते सभी मरीजों को सुरक्षित वार्डों में स्थानांतरित कर दिए जाने से एक बड़ा हादसा टल गया।

    आईसीयू (ICU) वार्ड में अचानक आग लग गई: घटना का विस्तृत विवरण

    अस्पताल के स्थानीय प्रमुख राजीव कुमार ने बताया कि प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट माना जा रहा है। आग लगते ही अस्पताल के कर्मचारियों ने सबसे पहले आईसीयू में भर्ती मरीजों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया और अस्पताल में लगे अग्निशमन उपकरणों की मदद से आग बुझाने का प्रयास किया। हालांकि आग तेजी से फैलने लगी, जिसके बाद तत्काल झारखंड अग्निशमन विभाग को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया।

    इस घटना में किसी मरीज, डॉक्टर या अस्पताल कर्मी के घायल होने की सूचना नहीं है, लेकिन आईसीयू वार्ड में रखे उपकरणों और अन्य संसाधनों को भारी नुकसान पहुंचा है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार आग से लाखों रुपये की संपत्ति क्षतिग्रस्त हुई है। आईसीयू में लगे वेंटिलेटर, मॉनिटर और अन्य जीवनरक्षक उपकरण जलकर खाक हो गए, जिससे अस्पताल की गहन चिकित्सा सेवाएं अस्थायी रूप से बाधित हुई हैं।

    प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और जांच

    घटना की सूचना मिलने पर आदित्यपुर थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी है। पुलिस आग लगने के कारणों की विस्तृत पड़ताल कर रही है और फोरेंसिक टीम को भी बुलाया गया है। वहीं, अस्पताल प्रशासन ने मरीजों के इलाज की व्यवस्था अन्य वार्डों में जारी रखी है। गंभीर मरीजों को निकट के टाटा मेन अस्पताल और एमजीएम अस्पताल में स्थानांतरित करने की व्यवस्था की गई है।

    अस्पताल में हुई इस घटना के बाद कुछ देर के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया, लेकिन प्रशासन की त्वरित कार्रवाई और दमकल विभाग की तत्परता के कारण स्थिति जल्द ही नियंत्रण में आ गई। समय पर राहत कार्य होने से एक संभावित बड़ी दुर्घटना टल गई, जिससे मरीजों और उनके परिजनों ने राहत की सांस ली। जिला उपायुक्त ने घटना का संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए हैं और सभी निजी अस्पतालों को अग्नि सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश जारी किया है।

    अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा के मानक और चुनौतियां

    भारत में अस्पतालों के लिए अग्नि सुरक्षा मानक राष्ट्रीय भवन संहिता (NBC) और भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा निर्धारित किए जाते हैं। आईसीयू जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में स्वचालित अग्निशमन प्रणाली, धुआं डिटेक्टर, स्प्रिंकलर सिस्टम और आपातकालीन निकास अनिवार्य हैं। इस घटना ने एक बार फिर अस्पताल प्रबंधन को अग्नि सुरक्षा ऑडिट और नियमित मॉक ड्रिल के महत्व को रेखांकित किया है। अग्नि सुरक्षा दिशानिर्देश के अनुसार, उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में हर छह महीने में निरीक्षण आवश्यक है। झारखंड सरकार ने हाल ही में सभी निजी अस्पतालों के लिए फायर NOC अनिवार्य कर दिया है, लेकिन कई अस्पताल अभी भी मानकों को पूरा नहीं करते।

    विद्युत सुरक्षा और रखरखाव की आवश्यकता

    विशेषज्ञों का मानना है कि अस्पतालों में आग लगने का सबसे आम कारण विद्युत दोष होता है। आईसीयू में बड़ी संख्या में उपकरण लगातार चलते रहते हैं, जिससे वायरिंग पर अत्यधिक भार पड़ता है। नियमित विद्युत ऑडिट, पुरानी वायरिंग का प्रतिस्थापन और लोड बैलेंसिंग ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए महत्वपूर्ण हैं। अस्पताल प्रबंधन को वार्षिक विद्युत सुरक्षा प्रमाणपत्र प्राप्त करना चाहिए और थर्मल इमेजिंग के माध्यम से हॉटस्पॉट की पहचान करनी चाहिए।

    मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि: भविष्य के लिए सबक

    इस घटना में शून्य जनहानि होना अस्पताल कर्मचारियों की तत्परता और प्रशिक्षण का प्रमाण है। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए अस्पताल प्रबंधन को विद्युत तारों का नियमित निरीक्षण, अग्निशमन उपकरणों का रखरखाव और कर्मचारियों के लिए नियमित प्रशिक्षण सुनिश्चित करना चाहिए। मरीजों के परिजनों ने अस्पताल स्टाफ की त्वरित प्रतिक्रिया की सराहना की है। [INTERNAL_LINK_HOLDER]

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